Sunday, February 19, 2017

60 फीसद विद्यार्थी एग्जाम फोबिया के शिकार

फरवरी शुरू होने के साथ ही परीक्षाओं का तनाव भी विद्यार्थियों को परेशान करने लगा है। इस समय रीजन में 60 फीसद विद्यार्थी एग्जामिनेशन फोबिया से ग्रस्त हैं। यह हम नहीं बल्कि सीबीएसई द्वारा शुरू की गई एग्जाम हेल्पलाइन नंबर पर आ रहे मामलों के आकड़े बता रहे हैं।
सीबीएसई की ओर से नियुक्त काउंसलर के मुताबिक, रोजाना आ रही कॉल्स में लगभग 45 से 50 फीसद विद्यार्थी प्रोकैस्टिनेशन डिसऑर्डर का शिकार हैं, तो वहीं 10 परसेंट बच्चे एग्जाम फोबिया की चपेट में आ गए हैं। सीबीएसई ने विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों के लिए 9 फरवरी से 29 अप्रैल तक काउंसलिंग सेल स्थापित किया है। जहां वह टोल फ्री नंबर 1800118004 व ऑनलाइन भी काउंसलिंग करवा सकते हैं। सीबीएसई ने परीक्षा से संबंधित तनाव को दूर करने के लिए देश भर से 90 लोगों का पैनल बनाया गया है। जो कि विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों की परीक्षाओं से जुड़ी मानसिक समस्या से निजात दिला रहे हैं। पैनल में प्रिंसिपल, प्रशिक्षित, काउंसलर, मनोवैज्ञानिक व विशेष प्रशिक्षक हैं जो 9 फरवरी से 29 अप्रैल तक विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों की हर समस्या का समाधान करेंगे।
छह दिन में ही आए 600 से ज्यादा मामले
सीबीएसई ने 9 फरवरी से स्टूडेंट्स और पैरेंट्स के लिए फ्री काउंसलिंग हेल्पलाइन शुरू की है। इसके तहत छह दिन में ही विद्यार्थियों के तनावग्रस्त होने के करीब 600 मामले सामने आए हैं। इनमें अधिकतर केस पढ़ाई में मन ना लगने, ध्यान भटकने सहित एग्जाम फोबिया से जुड़े बताए गए हैं। इतना ही नहीं कई विद्यार्थी तो अपने विषयों से संबंधित सवाल भी हेल्पलाइन पर पूछ रहे हैं। आगे करियर सेलेक्शन को लेकर भी बहुत से विद्यार्थी तनाव में हैं।
टालमटोल की स्थिति हो सकती है खतरनाक: डॉ. जसबीर
मनोवैज्ञानिक व काउंसलर डॉ. जसबीर का कहना है कि अक्सर विद्यार्थी पढ़ाई को लेकर टालमटोल की स्थिति में रहते हैं। इस प्रॉब्लम को प्रोक्रैस्टिनेशन ने नाम से जाना जाता है। इसमें देखने को आता है कि पढ़ाई को लेकर विद्यार्थी अक्सर बहाने बनाते हैं। बार- बार कहने पर भी टालने की कोशिश करते हैं। पैरेंट्स इसे उनकी शरारत सोच कर जबरदस्ती करने लगते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो बच्चे की टालने की यह आदत गंभीर बीमारी का रूप भी ले सकती है। एग्जाम टाइम में यह प्रॉब्लम प्रेशर के साथ ज्यादा बढ़ने लगती है। इसी का नतीजा है कि एग्जाम करीब होने के चलते रीजन में करीब 60 फीसद विद्यार्थी किसी न किसी तरह की मानसिक समस्या की चपेट में आ गए हैं।
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रिजल्ट का डर, भूलने की आदत जैसी समस्याओं के आ रहे फोन: डॉ. सोना
हेल्पलाइन पर जो फोन कॉल्स आ रही हैं उनमें ज्यादातर विद्यार्थी परीक्षा का दबाव को महसूस कर रहे हैं। बच्चों में रिजल्ट का डर, भूलने की आदत, कंफ्यूजन, पढ़ाई में मन न लगना जैसे मामले आ रहे हैं। स्टूडेंट्स अगर एग्जाम टाइम को मैनेज करके स्टडी करें तो प्राब्लम नहीं होगी। अभिभावक भी बच्चों को समझें व उन्हें सहयोग दें।
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स्कूलों में भी हो रही है काउंसलिंग
बोर्ड परीक्षाओं को लेकर एपीजे स्कूल, इनोसेंट हा‌र्ट्स स्कूल, एमजीएन पब्लिक स्कूल, कैंब्रिज इंटरनेशनल, सीजेएस पब्लिक स्कूल, स्वामी संत दास स्कूल सहित अन्य दर्जन भर स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों में तनाव दूर करने के लिए स्कूल स्तर पर भी काउंसलिंग की जा रही है।

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