Wednesday, December 27, 2017

समुद्री इंजीनियरी में रोजगार

पृथ्वी की सतह का तीन-चौथाई हिस्सा पानी से घिरा है और यही कारण है कि समुद्री इंजीनियरी उन व्यक्तियों के लिए बहुत उत्तेजक और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है जो समुद्र के प्रति उत्कट हैं तथा यंत्रों के साथ कार्य करने के शौकीन हैं। हालांकि तुलनात्मक दृष्टि से यात्रा के लिए जलमार्गों का प्रयोग कम ही होता है, लेकिन 80% से अधिक मालढुलाई का काम समुद्र के जरिए होता है। सामान के अंतर्राष्ट्रीय निर्यात और आयात के लिए विभिन्न देश जहाजों तथा अन्य समुद्री जलयानों पर ही निर्भर होते हैं। जहां तक समुद्री जहाज और नौवहन का संबंध् है, समुद्री इंजीनियरी इससे जुड़ा सर्वाधिक मौलिक व्यवसाय है।

समुद्री इंजीनियरी, इंजीनियरी की एक वह शाखा है जो कि समुद्री वास्तुकला तथा विज्ञान से संबंधित है। 'समुद्री इंजीनियरी' शब्द का अर्थ है ऐसा अनुसंधान कार्य जो कि महासागरों और तटीय या समुद्र से जुड़े अंतर्देशीय जल में संचालित किया जाता है। समुद्री इंजीनियरी पाठ्यक्रम जहाजों के निर्माण तथा जहाजों के अनुरक्षण और अन्य समुद्री नौकाओं से संबंधित होते हैं।

समुद्री इंजीनियरों पर जहाज के तकनीकी प्रबंधन का पूर्ण दायित्व होता है। उन पर जहाजों के यंत्रों के चयन के लिए जिम्मेदारी होती है, जिनमें डीजल इंजन, भाप टरबाईन, गैस टरबाईन शामिल हो सकते हैं तथा साथ ही उन पर पूरे जहाज के यांत्रिक, वैद्युत, फ्रल्युड और नियंत्रण प्रणालियों के डिजाइन का भी दायित्व होता है।

वे जहाज के क्रू के सदस्य होते हैं जो कि समुद्री तकनीशियनों और दस्तकारों की टीम के प्रबंधन के प्रभारी होते हैं। इंजन कक्ष के निर्माण, प्रचालन तथा अनुरक्षण संबंधी कार्य समुद्री इंजीनियर का मुख्य दायित्व होता है।

समुद्री इंजीनियर बनने के वास्ते समुद्री विज्ञान में बीई अपेक्षित शैक्षणिक योग्यता है। यह एक ऐसा कॅरिअर है जिसमें ऑफ-शोर रोजगारों सहित विभिन्न तरह के रोजगारों के व्यापक अवसर मौजूद हैं। इसका सर्वाधिक आकर्षक भाग है बहुत अच्छे पारिश्रमिक के साथ-साथ अनिवासी भारतीय का दर्जा। बहुत से भारतीय और विदेशी संस्थान समुद्री इंजीनियरी में पाठ्यक्रम संचालित करते हैं। समुद्री इंजीनियरों के लिए रोजगार के व्यापक अवसर इंतजार कर रहे हैं और इनके लिए करीब 100% प्लेसमेंट की दर है। अंतर्राष्ट्रीय वैश्विक समुद्री यातायात में वृद्वि के साथ ही सार्वजनिक और निजी नौवहन कम्पनियों में समुद्री इंजीनियरों की मांग में बहुत अधिक वृद्वि हुई है।

पात्रता

समुद्री इंजीनियर बनने के लिए समुद्री इंजीनियरिंग/ समुद्री विज्ञान में बीई और यांत्रिक इंजीनियरी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा मौलिक योग्यता है। समुद्री इंजीनियरिंग या समुद्री विज्ञान में बैचलर डिग्री के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता विज्ञान विषयों में, जैसे कि भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित में उच्च अंक-प्रतिशतता के साथ जमा दो या समकक्ष योग्यता है। ये पाठ्यक्रम 4 वर्ष की अवधि के हैं। चेन्नै स्कूल ऑफ शिप मैनेजमेंट समुद्री इंजीनियर बनने के लिए तीन वर्ष की अवधि का वैकल्पिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है। एक अच्छा समुद्री इंजीनियर बनने के लिए अच्छा स्वास्थ्य होना अपेक्षित है।

शारीरिक फिटनेस आवश्यक है तथा कुछेक चिकित्सा मानदंड भी हैं जिनका होना समुद्री इंजीनियरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए जरूरी है उम्मीदवार की न्यूनतम ऊंचाई 150 सेंमी. होनी चाहिए तथा इसके अनुसार वजन और समानुपातिक रूप से न्यूनतम 5 सेंमी. के विस्तार के साथ सीना भी होना चाहिए। उन्हें निर्धारित मानदंडों के तहत समुद्री सेवा के लिए चिकित्सा फिटनेस परीक्षण में सफल होना होगा तथा उनकी नेत्र दृष्टि 6/6 हो और कोई रंगांधता न हो।

जिनके पास समुद्री इंजीनियरी में बीई योग्यता है, और आगे अध्ययन के इच्छुक हैं वे दो वर्ष की अवधि का स्नातकोत्तर अध्ययन (अर्थात्‌ समुद्री इंजीनियरी में एमई) तथा पी-एच. डी. कर सकते हैं। एम.ई. और पी-एच.डी. के लिए शैक्षणिक योग्यता क्रमशः बी.ई. समुद्री विज्ञान और एम.ई. समुद्री विज्ञान है। भारत में और विदेश में कई संस्थानों द्वारा ये पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

व्यक्तिगत कौशल :

समुद्री इंजीनियर बनने के वास्ते किसी भी व्यक्ति के पास कुछ अनिवार्य व्यक्तिगत खूबियां होना जरूरी हैं। अच्छी अंग्रेजी भाषा दक्षता और शारीरिक फिटनेस अनिवार्य है। उनके पास उत्कृष्ट तकनीकी ज्ञान, गणित तथा सूचना प्रौद्योगिकी कौशल होना चाहिए। किसी समुद्री इंजीनियर के पास सांगठनिक गुणवत्ता, टीम भावना और व्यावहारिक सोच के साथ-साथ सामान्य सूझबूझ होनी चाहिए। उनके पास दबाव में भी शांत रहने के गुण होने चाहिए तथा यह ज्ञान होना चाहिए कि स्थिति से कैसे निपटा जा सकता है उन्हें स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा उनकी समुद्री यात्रा में रुचि हो और अपने कार्य के प्रति समर्पण का भाव हो।

रोजगार की संभावना तथा कॅरिअर विकल्प

समुद्री इंजीनियरों को डिजाइनिंग, अनुसंधान और कंसलटेंसी के क्षेत्रों में भी नियुक्त किया जाता है। उनके लिए डिजाइनिंग और भवन फर्मों में भी अवसर हैं तथा वे शिक्षण या प्रशिक्षण व्यवसाय से भी जुड़ सकते हैं। वे ऐसे किसी अन्य व्यवसाय से भी जुड़ सकते हैं जिसके लिए मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरी स्नातक योग्यता की आवश्यकता होती है।

समुद्री इंजीनियरों के लिए विदेशों में भी बेहतरीन रोजगार के अवसर मौजूद हैं। अंतर्राष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त संगठन ऐसे नवीन व्यक्तियों तथा प्रशिक्षणार्थियों को भी भर्ती करते हैं, जिन्हें कोई अनुभव नहीं होता है, संबंधित ब्यूरो नौसेना वास्तुकला, समुद्री इंजीनियरी तथा संबद्व विषयों के सिद्वान्तों पर आधारित नियम तैयार करने के काम करते हैं। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे अन्य देशों द्वारा भी युवा समुद्री इंजीनियरों की भर्ती की जाती है।

पारिश्रमिक

इंजीनियरी के क्षेत्र में अच्छे वेतन वाले कॅरिअर्स में समुद्री इंजीनियरी भी एक है। प्रवेश स्तर पर भी समुद्री इंजीनियर को बेहतरीन वेतन पैकेज मिलता है। एक कनिष्ठ अभियंता भारतीय जहाज में करीब 25000-30000 रु. प्रति माह तथा विदेशी जहाज में करीब 74,000 रु. प्रति माह अर्जित कर सकता है। मुख्य अभियंता को करीब 1,85,000 रु. प्रतिमाह तक प्राप्त होता है।

समुद्री इंजीनियरी पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थान

बंगलौर इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग एंड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी, रु5, एसआरएस काम्प्लेक्स, एनजीईएफ ले आउट, 80, फीट रोड, नगराबवी, बंगलौर-560072

कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (आन्ध्र प्रदेश), वाल्टेअर, विशाखापत्तनम-530003 (आन्ध्र प्रदेश)

नौवहन महानिदेशालय, जहाज भवन, बेलार्ड एस्टेट, वालचंद हीराचंद मार्ग, मुंबई-400001 (महाराष्ट्र) आईआईटी, (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान), पवई, मुंबई-400076 (महाराष्ट्र)

भारतीय समुद्री कॉलेज, पी.एस. नं. 1262, काचिगुडा स्टेशन रोड, हैदराबाद-500027, (आन्ध्र प्रदेश)

इंटरनेशनल मॅरीन कम्युनिकेशन सेंटर, 134/3 आरएच रोड, निकट लुज कॉर्नर, माइलापोर, चेन्नै-600004

लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज ऑफ एडवांस्ड मैरीटाइम स्टडीज एंड रिसर्च, हे-बंडर, सेवरी, मुंबई-400033 (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र अकेडमी ऑफ नेवॅल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एमएएनईटी), गेट नं. 140, लोनी कलभोर, राजबाग, पुणे-सोलापुर राजमार्ग, पुणे-412201 (महाराष्ट्र)

मॅरीन इंजीनियरी एवं अनुसंधान संस्थान, हे बंडर रोड, मुंबई-400033 (महाराष्ट्र)

मॅरीन इंजीनियरी इंस्टीट्यूट, पी-19, तारतोला रोड, कोलकाता-700088 (पश्चिम बंगाल)

मोहम्मद साथक इंजीनियरी कॉलेज, किलाकराई- 623806,

रामनाथपुरम जिला, तमिलनाडु पदमभूषण वसंतदादा पाटिल प्रतिष्ठान का कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पूर्वी एक्सप्रेस राजमार्ग, निकट एवरेड नगर, चूनाभट्ठी, चैम्बर, मुंबई-400022 (महाराष्ट्र)

आर.एल. इंस्टीट्यूट ऑफ नॉटिकल साइंस, टीवीआर नगर, अरूपुकोट्टाई रोड, मदुरई- 625022, तमिलनाडु राजस्थान विद्यापीठ (विश्वविद्यालयवत्‌), विश्वविद्यालय, राजस्थान

टी.एस. चाणक्य, करौस, न्यू मुंबई-400706 (महाराष्ट्र)

तोलानी मैरीटाईम इंस्टीट्यूट, तालेगांव, चाकन रोड, इंदुरी, तालेगांव, पुणे-410507 (महाराष्ट्र)

10+2 और उसके बाद पत्राचार पाठ्यक्रमों के माध्यम से करियर

करियर एवं पाठ्यक्रमों के बारे में नवीनतम जानकारी के साथ गति बनाए रखना एक निरुत्साही कार्य रहा है। आज सभी विषयों में अधिस्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम विद्यमान हैं अधिस्नातक पाठ्यक्रमों का उद्देश्य पाठ्यक्रम विशेष के सभी परिचालन क्षेत्रों में बुनियादी ज्ञान देना होता है। अधिस्नातक पाठ्यक्रमों को स्नातक डिग्री कहा जा सकता है। इनके नाम में कोई वास्तविक अंतर नहीं है। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालयों द्वारा चलाए जाते हैं और इनमें सभी विषय-विधाओं के 10+2 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश एक चयन परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है।

पत्राचार शिक्षा ने, हमारे देश की शिक्षा-प्रणाली में एक आश्चर्यजनक परिवर्तन ला दिया है। यह अनुमान लगाया जाता है कि आगामी शताब्दी के अगले दो दशकों में परम्परागत अध्यापन के अध्यापक उपग्रह संचार, लो पावर ट्रांसमीटर्स की सहायता से और सूचना सुपर-हाइवेज़ के माध्यम से देश भर की शिक्षा का लाइव प्रदर्शन कर सकेंगे। इस संबंध में शुरूआत हो चुकी है। हमारे देश में 14 खुले विश्वविद्यालय तथा 75 नियमित विश्वविद्यालय और कई अन्य संस्थाएं दूरस्थ अध्ययन कार्यक्रम चलाते हैं। दूरस्थ शिक्षा पद्धत्ति कई श्रेणियों के शिक्षार्थियों, विशेष रूप से (क) देरी से पढ़ाई शुरू करने वालों, (ख) जिन व्यक्तियों के घर के पास उच्चतम शिक्षा साधन नहीं है, (ग) सेवारत व्यक्तियों और (घ) अपनी शैक्षिक योग्यताएं बढ़ाने के इच्छुक व्यक्तियों को लाभ प्रदान कर रही है।

खुले विश्वविद्यालय ऐसे लचीले पाठ्यक्रम विकल्प देते हैं, जिन्हें वे प्रवेशार्थी ले सकते हैं जिनके पास कोई औपचारिक योग्यता नहीं है किंतु अपेक्षित आयु (प्रथम डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए 18 वर्ष) के हो चुके हैं और लिखित प्रवेश परीक्षा भी उत्तीर्ण कर चुके हैं। ये पाठ्यक्रम छात्र की सुविधानुसार भी लिए जा सकते हैं। विश्वविद्यालयों के दूरस्थ शिक्षा केंद्र न्यूनतम पात्रता रखने वाले उम्मीदवारों को प्रवेश देते हैं। यह पात्रता नियमित पाठ्यक्रमों के समान ही होती है। पत्राचार शैक्षिक संस्थाएं छात्रों को पाठ्यक्रम सामग्री, सम्पर्क कक्षाएं उपलब्ध कराती हैं और परीक्षाएं संचालित करती हैं।

अधिकांश अध्यापन-अध्ययन प्रक्रिया में मुद्रित अध्ययन सामग्री तथा नोडल केंद्रों पर मल्टीमीडिया सुविधा सेट-अप या दूरदर्शन अथवा रेडियो नेटवर्क के माध्यम से अध्यापन शामिल होता है। ये विश्वविद्यालय स्नातक पाठ्यक्रम, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम, एम.फिल, पी.एच.डी. तथा डिप्लोमा एवं प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम भी चलाते हैं, जिनमें से अधिकांश पाठ्यक्रम करियर उन्मुखी होते हैं।

निम्नलिखित खुले विश्वविद्यालय/ विश्वविद्यालय/संस्थाएं पत्राचार पाठ्यक्रम चलाते/चलाती हैं:-

खुले विश्वविद्यालय

1. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली-110068, भारत, टेलीफोन: 91-11-29532321, 29535924-32, फैक्स: 91-11-29536588 ई-मेल: rmohan@ignou.ac.in

2. डॉ. बी.आर. आंबेडकर खुला विश्वविद्यालय, (बीआरएओयू) हैदराबाद, आंध्र प्रदेश (1982) प्रोफेसर जी.राम रेड्डी मार्ग, मार्ग सं. 46, जुबली हिल्स, हैदराबाद-500033, आंध्र प्रदेश, भारत, टेलीफोन: 9140-23544910, ई-मेल: open@braou.ac.in

3. वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (वी.एम.ओ.यू.), कोटा, राजस्थान (1987), रावतभाटा रोड, अखेलगढ़, कोटा-324010, राजस्थान, टेलीफोन: 91-744-2471254, फैक्स: 91-744-2470451

4. नालंदा खुला विश्वविद्यालय (एन.ओ.यू), पटना, बिहार, (1987), तीसरी मंजिल, बिस्कोमॉन भवन, पश्चिम गांधी मैदान, पटना-800001, बिहार, भारत, फोन: 91-612-2201013, ई-मेल: nalpuni@bih.nic.in

5. यशवंतराव चह्नाण महाराष्ट्र खुला विश्वविद्यालय (वाईसीएमओयू), नाशिक, महाराष्ट्र-(1989)ध्यानगंगोत्री, गंगापुर डैम के पास, नाशिक-422222, महाराष्ट्र, भारत, टेलीफोन: 91-253-2231714, 2231715, ई-मेल: openuniv@vsnl.com

6. मध्य प्रदेश भोज खुला विश्वविद्यालय (एम.पी.बी.ओ.यू.) भोपाल, म.प्र. (1991), आई.टी.आई (गैस राहत) भवन गोविंदपुरा, भोपाल-462023, टेलीफोन: 0755-2784102, ई-मेल: vc@rbuphop.mp.nic.in

7. डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर खुला विश्वविद्यालय (बीएओयू), अहमदाबाद, गुजरात (1994), राजकीय, बंगला नं. 9, डफनाला शाही बाग, अहमदाबाद-380003, गुजरात, भारत, टेलीफोन: 91-79- 22869690/91, ई-मेल: baou@sancharnet.in

8. कर्नाटक राज्य खुला विश्वविद्यालय (के.एस.ओ.यू.) मैसूर, कर्नाटक, (1996) मनसागंगोत्री, मैसूर-570006, कर्नाटक, भारत, टेलीफोन: 91-821-2515149, फैक्स: 91-821-2500846, ई-मेल: vcksou@eth.net

9. नेताजी सुभाष खुला विश्वविद्यालय (एन.एस.ओ.यू.), कोलकाता, प.बं. (1997) 1, वुडबर्न पार्क, कोलकाता-700020, पश्चिम बंगाल, भारत, टेलीफोन: 91-33-22835157, फैक्स: 91-33-22835052, ई-मेल: nsou@cal2.vsnl.net.in

10. उ.प्र. राजश्री टंडन खुला विश्वविद्यालय (यूपीआरटीओयू), इलाहाबाद, उ.प्र. (1998), 17, महर्षि दयानंद मार्ग, (थॉर्नहिल रोड), इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत, टेलीफोन: 91-532-2621840, ई-मेल: uprtou_alld@hclinfinet.com

11. तमिलनाडु खुला विश्वविद्यालय (टी.एन.ओ.यू.), चेन्नै, तमिलनाडु (2002), तकनीकी शिक्षा निदेशालय कैम्पस, ग्विंडी, चेन्नै-600025, फोन: 044-22351414, फैक्स: 044-22200601

12. पंडित सुंदरलाल शर्मा खुला विश्वविद्यालय (पीएसएसओयू), बिलासपुर, छत्तीसगढ़ (2005),पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क के पास, व्यापार विहार, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)-495001, फोन: 07752-514255

13. उत्तरांचल खुला विश्वविद्यालय, हल्द्वानी, (नैनीताल), उत्तरांचल - सौरभ माउंट व्यू के पास, भोटिया पड़ाव, हल्द्वानी-263141, नैनीताल

14. के.के. हैंडकि, राज्य विश्वविद्यालय, गुवाहाटी, असम

दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम चलाने वाले अन्य राज्य विश्वविद्यालय

1. जवाहरलाल नेहरू प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हैदराबाद, आं.प्र.
2. काकतिया विश्वविद्यालय, वरंगल, आं.प्र.
3. उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद, आं.प्र.
4. पोट्टी श्रीरामुलु तेलुगु विश्वविद्यालय, हैदराबाद, आं.प्र.
5. श्री कृष्णदेवराया विश्वविद्यालय, अनंतपुर, आं.प्र.
6. श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, आं.प्र.
7. नलसार विधि विश्वविद्यालय, हैदराबाद, आं.प्र.
8. नागार्जुन विश्वविद्यालय, नागार्जुन नगर, आं.प्र.
09. बंगलौर विश्वविद्यालय, बंगलौर, कर्नाटक
10. कन्नड विश्वविद्यालय, हम्पी, कर्नाटक
11. गुलबर्गा विश्वविद्यालय, गुलबर्गा, कर्नाटक
12. मैंगलोर विश्वविद्यालय, मंगलागंगोत्री, कर्नाटक
13. कुवेम्पु विश्वविद्यालय, शंकरागट्टा, कर्नाटक
14. मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर, कर्नाटक
15. गोवा विश्वविद्यालय, गोवा
16. डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय, डिब्रूगढ़, असम
17. गौहाटी विश्वविद्यालय, गुवाहाटी, असम
18. बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बिहार
19. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा, बिहार
20. पटना विश्वविद्यालय, पटना, बिहार
21. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार
22. उड़ीसा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर, उड़ीसा
23. सम्बलपुर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर, उड़ीसा
24. बरहामपुर विश्वविद्यालय, बरहामपुर, उड़ीसा
25. उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर, उड़ीसा
26. फकीर मोहन विश्वविद्यालय, बालासोर, ओडि़शा
27. नार्थ उड़ीसा विश्वविद्यालय, मयूरभंज, ओडि़शा
28. त्रिपुरा विश्वविद्यालय, त्रिपुरा
29. बर्दवान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल
30. विद्यासागर विश्वविद्यालय, मिदनापुर, पश्चिम बंगाल
31. जादवपुर विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल
32. रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल
33. कल्याणी विश्वविद्यालय, जिला-नाडिया, पश्चिम बंगाल
34. गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा
35. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, हरियाणा
36. एम.डी. विश्वविद्यालय, रोहतक, हरियाणा
37. एच.पी. विश्वविद्यालय, शिमला, (हि.प्र)
38. जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू-कश्मीर
39. कश्मीर विश्वविद्यालय, श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर
40. पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, पंजाब
41. पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला पंजाब
42. गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर, पंजाब
43. जी.बी.पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर, उत्तरांचल
44. कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल, उत्तरांचल
45. बी.आर. आम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा, उ.प्र.
46. लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उ.प्र.
47. गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
48. अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, म.प्र.
49. बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, इंदौर, म.प्र.
50. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, भोपाल, म.प्र.
51. डॉ. हरिसिंह गौड़ विश्वविद्यालय, सागर, म.प्र.
52. जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर, म.प्र.
53. एम.जी. चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट, म.प्र.
54. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, म.प्र.
55. शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर, म.प्र.
56. एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, मुंबई, महाराष्ट्र
57. मुंबई विश्वविद्यालय, विद्यानगरी, मुंबई
58. अमरावती विश्वविद्यालय, अमरावती
59. स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, नांदेड, महाराष्ट्र
60. महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टयम, केरल
61. कालीकट विश्वविद्यालय, कालीकट, केरल
62. कन्नूर विश्वविद्यालय, काल्लियासेरी, केरल
63. केरल विश्वविद्यालय, त्रिवेंद्रम, केरल
64. अलगप्पा विश्वविद्यालय, कराइकुडी, तमिलनाडु
65. अन्नामलै विश्वविद्यालय, अन्नामलैनगर, तमिलनाडु
66. भरथियार विश्वविद्यालय, कोयम्बत्तूर, तमिलनाडु
67. भारतीदासन विश्वविद्यालय, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
68. मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, मदुरै, तमिलनाडु
69. मेननमणियम सुंदरनगर विश्वविद्यालय, तिरुनेलवेली, तमिलनाडु
70. मदर टेरेसा महिला विश्वविद्यालय, कोडईकनाल, तमिलनाडु
71. तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बत्तूर, तमिलनाडु
72. मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास, तमिलनाडु
73. पेरियार विश्वविद्यालय, सलेम, तमिलनाडु
74. तमिलनाडु डॉ. आम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, चेन्नै

पाठ्यक्रम

पत्राचार के माध्यम से डिग्री पाठ्यक्रम (स्नातक एवं स्नातकोत्तर)
• बी.ए. (लगभग सभी विषय)
• बी.ए. (लगभग सभी विषय), बी.कॉम.
• एम.ए. (लगभग सभी विषय), एम.एस.सी. (लगभग सभी विषय), एम.कॉम.
• बी.बी.ए./बी.बी.एम./बी.बी.एस.
• बी.जे.एम.सी, बी.टेक, एम.टेक
• पर्यटन स्नातक
• बी.एड., एम.एड
• बी.एल.आई.एस, एम.एल.आई.एस.v • बी.बी.ए., एम.बी.ए.
इन विश्वविद्यालयों द्वारा कई डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं। चलाए जाने वाले कुल डिप्लोमा/प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम निम्नलिखित हैं।

इंजीनियरी/प्रौद्योगिकी से जुडे़ पाठ्यक्रम

• शर्करा प्रौद्योगिकी
• औद्योगिक संरक्षा
• रसायन प्रसंस्करण, इंस्ट्रूमेंटेशन एवं नियंत्रण
• अनुप्रयुक्त इलेक्ट्रॉनिकी
• ऑटोमोबाइल प्रौद्योगिकी

कम्प्यूटर पाठ्यक्रम

• कार्यालय प्रबंधन/सेवा हेतु कम्प्यूटर
• कम्प्यूटर अनुप्रयोग/कम्प्यूटर विज्ञान/कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग
• कम्प्यूटर प्रणाली

कृषि

• बागवानी
• उर्वरक प्रौद्योगिकी
• मुर्गीपालन विज्ञान, एक्वाकल्चर, झींगामछली पालन, सेरीकल्चर

शिक्षा

• मार्गदर्शन एवं परामर्श
• शिशु शिक्षा एवं देखरेख
• शैक्षिक नियोजन
• विद्यालय प्रबंधन

व्यावसायिक

• सौंदर्य प्रसाधन विज्ञान
• विज्ञापन
• टी.वी. मेकेनिक्स
• चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी
• निर्माण प्रबंधन
• बैंकिंग
• बैंकिंग तथा वित्त में डिप्लोमा

स्वास्थ्य

• डाइट थेरेपी
• खाद्य एवं पोषण
• औद्योगिक प्रदूषण एवं नियंत्रण
• औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन
• पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा
• समाज पोषण

विधि

• सामान्य विधि स्नातक (बी.जी.एल.)
• शैक्षिक विधि स्नातक (एलएलबीएके), एलएलएम
• श्रम विधि में डिप्लोमा
• कराधान विधि
• कम्पनी विधि में डिप्लोमा
• उपभोक्ता परिरक्षण विधि एवं विधि तथा सार्वजनिक सेवा में डिप्लोमा

Thursday, December 14, 2017

आपदा प्रबंधन में रोजगार

आपदा ऐसे न रोके जा सकने वाले प्राकृतिक तथा मानवीय प्रभाव हैं जिन्हें उपयुक्त प्रबंधन विकल्पों द्वारा कम किया जा सकता है। भारत विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है और यहां प्राकृतिक तथा मानवीय आपदाओं की अत्यधिक संभावना है। भारत का भू-भाग 135.79 मिलियन वर्ग किलोमीटर है जो विश्व का 2.4% है। जबकि इसकी जनसंख्या विश्व जनसंख्या की 16.7% है। हमारे देश की भू-वैज्ञानिक तथा भौगोलिक संरचना ऐसी है जो इसे आपदाओं की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। देश के उत्तर तथा पूर्वोत्तर भाग में एक पर्वत श्रृंखला-हिमालय अत्यधिक भूकंप, भूस्खलन तथा हिमस्खलन जनित क्षेत्र है। उत्तरी भारत के भू-भाग में बाढ़ तथा सूखे का खतरा होता है। हमारा उत्तर-पश्चिमी भाग सूखे तथा बंजरता की संभावना वाला क्षेत्र है, जबकि हमारे तटीय क्षेत्रों में सुनामी तथा चक्रवात के खतरे होते हैं। दूसरे शब्दों में हमारा देश सभी प्रकार की आपदाओं अर्थात भूकंप, सूखे, बाढ़, चक्रवात, सुनामी, भूस्खलन, हिमस्खलन, बंजरता, जंगल की आग तथा औद्योगिक वाहन (सड़क,रेल, वायु) दुर्घटनाओं की संभावनाओं वाला क्षेत्र है। विश्व में 90% आपदाएं विकासशील देशों में घटती हैं। भारत में, 70% क्षेत्र सूखा प्रवृत्त, 12% बाढ़ प्रवृत्त, 60% भूकंप प्रवृत्त तथा 8% चक्रवात प्रवृत्त हैं। प्रतिशतता के ये आंकड़े दर्शाते हैं कि हमें ऐसी प्रशिक्षित जनशक्ति की आवश्यकता है जो आपदा के समय सहायता कर सके और आपदा नियंत्रण की स्कीमों के नियोजन, निगरानी तथा प्रबंधन में मदद कर सके। आज के परिवर्तनशील प्रौद्योगिकी परिदृश्य के संदर्भ में, हमें उद्योग तथा सरकारी एवं निजी संगठनों के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति की तत्काल आवश्यकता है।

आपदाओं के प्रकार

आपदाएं मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं -प्राकृतिक तथा मानव द्वारा उत्पन्न। प्राकृतिक आपदाएं जैसे- भूकंप, भूस्खलन, सूखा, बाढ़, सुनामी एवं चक्रवात आदि प्रकृति के कारण घटित होती हैं, जबकि मानवीय आपदाएं मनुष्य के कार्यों जैसे सड़क, रेल, हवाई तथा औद्योगिक दुर्घटनाओं के कारण आती हैं, भूकंप पृथ्वी के आतंरिक दबाव एवं उनके समायोजन के कारण आते हैं, भारत को, भूकंप की संभावनाओं के आधार पर पांच भूकंपीय जोनों में बांटा गया है। भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र सामान्यतः हिमालयी, उप-हिमालयी क्षेत्रों, कच्छ तथा अण्डमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में स्थित हैं। भयंकर भूकंपों जैसे उत्तरकाशी (1991), लातूर (1993) तथा जबलपुर (1997) के अतिरिक्त साधारण तथा हल्के भूकंप भी बड़ी संख्या में देश के विभिन्न भागों में आए हैं। गुरुत्व, घर्षण, भूकंप, बरसात तथा मानव निर्मित कृत्यों से चट्टानों के खिसकने के कारण भूस्खलन होता है।

सूखा, बारिश के कम मात्रा में होने के कारण पड़ता है। सूखा मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है - मौसम विज्ञान से संबंधित, जलविज्ञान से संबंधित तथा कृषि से संबंधित। देश में 16 प्रतिशत क्षेत्रफल सूखा प्रवृत्त है। बीसवीं शताब्दी में वर्ष 1941, 1951, 1979, 1982 तथा 1987 में भयंकर सूखा पड़ा था। देश का उत्तर-पश्चिमी भाग अत्यधिक सूखा-प्रवृत्त क्षेत्र है।

कम समय में अधिक बारिश होने विशेष रूप से चिकनी मिट्टी, कम दबाव के क्षेत्र तथा निकास-बहाव के कम होने के कारण बाढ़ आती है। भारत दूसरा अत्यधिक बाढ़ प्रभावित देश है, जहां वर्षा ऋतु में यह आम बात है। प्रायः प्रत्येक वर्ष भयानक बाढ़ आती है जिसके कारण जान की क्षति, सम्पत्ति की क्षति, स्वास्थ्य समस्या तथा मनुष्यों की मृत्यु आदि जैसी घटनाएं घटित होती हैं। राष्ट्रीय बाढ़ आयोग रिपोर्ट (1980) में देश में 40 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्रफल को बाढ़ प्रवृत्त क्षेत्र निर्धारित किया गया है। देश में गंगा, बह्मपुत्र, नर्मदा, ताप्ति, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदी घाटी अत्यधिक बाढ़ प्रवृत्त क्षेत्र हैं।

महासागरों में भूकंप आने के कारण समुद्री तूफान (सुनामी) आते हैं। चक्रवात समुद्रों में तापमान तथा दबाव में भिन्नता होने के कारण आते हैं। बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में प्रतिवर्ष औसतन 5 से 6 उष्ण कटिबंधी चक्रवात आते हैं।

बंगाल की खाड़ी में पूर्वी तट के समानांतर पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु तथा अरब सागर राज्यों में पश्चिमी तट के समानांतर गुजरात एवं महाराष्ट्र चक्रवात तथा सुनामी की अत्यधिक संभावना वाले क्षेत्र हैं।

जंगल की आग या दावानल बरसाती जंगलों या लम्बे पत्ती वाले पेड़ों के जंगल में लगती है। गर्म तथा शुष्क क्षेत्रों में शंकुवृक्ष (कोनिफेरस) तथा सदाबहार बडे़ पत्ते वाले वृक्षों के जंगलों में प्रायः जंगल की आग लगती है। जंगल की आग पर्यावरण, कृषि भूमि, पशुओं तथा कीड़ों के लिए खतरनाक होती है। मानवीय आपदाएं मनुष्य की गलतियों जैसे सड़क, रेल, हवाई एवं औद्योगिक दुर्घटनाओं के कारण आती हैं।

आपदा प्रबंधन कार्मिकों की भूमिका:

प्रशिक्षित जनशक्ति, आपदा से पहले, आपदा के दौरान तथा आपदा के बाद की स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक होती है। प्रशिक्षित जनशक्ति आपदा प्रभावित व्यक्तियों के शीघ्र पुनर्वास में सहायता करती है, उनकी मनोवैज्ञानिक स्थितियों को समझती है और आपदा के बाद उन स्थितियों को दूर करने तथा उन्हें बसाने में सहायता करती है। नियोजन तथा नीति-निर्माण में, बेहतर सुझाव देने के लिए प्रशिक्षित एवं अनुभवी जनशक्ति की अत्यधिक आवश्यकता होती है।

देश में गृह मंत्रालय नोडल एजेंसी है जो आपदाओं पर निगरानी तथा प्रबंधन कार्य करती है। कृषि, रसायन, नागरिक उड्डयन, रेलवे, सड़क परिवहन, पर्यावरण एवं वन, स्वास्थ्य तथा परमाणु ऊर्जा जैसे अन्य मंत्रालय/विभाग अपने संबंधित क्षेत्रों/कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं।

आपदा प्रबंधन में शिक्षा:

आपदाओं के न्यूनीकरण, निगरानी तथा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति होना प्रथम आवश्यकता है। अनेक विश्वविद्यालय तथा संस्थान आपदा प्रबंधन में प्रमाणपत्र, स्नातकोत्तर डिप्लोमा, मास्टर तथा अनुसंधान डिग्री कार्यक्रम चलाते हैं। प्रमाणपत्र तथा स्नातक पाठ्यक्रम के लिए 10$2 मूल आवश्यकता है और स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा मास्टर डिग्री के लिए 55% अंकों के साथ स्नातक डिग्री (बी.ए./बीएस.सी./बी.कॉम.) होना जरूरी है। पी.एच.डी. डिग्री के लिए 55% अंकों की मास्टर डिग्री होना आवश्यक है। तथापि, प्रवेश-योग्यता प्रत्येक विश्वविद्यालय में अलग-अलग है। आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रम सभी विषयों के छात्रों के लिए उपयुक्त हैं, किंतु सामाजिकी, सामाजिक कार्य, अर्थशास्त्र, लोक प्रशासन, मनोविज्ञान, भूगोल, भूविज्ञान, मौसम विज्ञान तथा कृषि के छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इन विषयों के व्यक्ति अपने विशेष विषय के मूल ज्ञान का उपयोग आपदा प्रबंधन में कर सकते हैं। निम्नलिखित विश्वविद्यालय/संस्थान आपदा प्रबंधन में पाठ्यक्रम चलाते हैं।

1. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (www.ignou.ac.in)
• आपदा प्रबंधन प्रमाणपत्र
• स्नातकोत्तर आपदा प्रबंधन डिप्लोमा

2. सिक्किम मणिपाल स्वास्थ्य, चिकित्सा तथा प्रौद्योगिकी विज्ञान विश्वविद्यालय, गंगटोक (www.smu.ac.in)
• आपदा न्यूनीकरण में एमएस.सी। (दूरस्थ शिक्षा)

3. भारतीय पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संस्थान, नई दिल्ली। (www.ecology. Edu)
• आपदा न्यूनीकरण में एमएस.सी। (दूरस्थ शिक्षा)

4. अन्नामलई विश्वविद्यालय, अन्नामलई नगर, तमिलनाडु (www.annamalai university.ac.in)
• आपदा प्रबंधन में एम.ए। (दूरस्थ शिक्षा)

5. पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ (www.pu.ac.in)
• आपदा प्रबंधन में एम.ए.

6. वर्धवान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा (www.vmou.ac.in)
• आपदा प्रबंधन में प्रमाणपत्र, आपदा प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा,

7. गुरू गोविंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली (www.ipu.ac.in)
• आपदा प्रबंधन केन्द्र
• एम.बी.ए। (आपदा प्रबंधन) सप्ताहांत कार्यक्रम

8. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एन.आई.डी.एम.), इन्द्रप्रस्थ एस्टेट, रिंग रोड, नई दिल्ली (www.nidm.gov.in)
• कैम्पस में तथा ऑनलाइन अल्प-कालीन विशेषज्ञतापूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम

9. मद्रास विश्वविद्यालय, चेन्नई (www. uom.ac.in)
• अंतर्राष्ट्रीय मद्रास विश्वविद्यालय केन्द्र, चेन्नई
• आपदा प्रबंधन में पी.जी। डिप्लोमा

10. ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी, कोहिमा, नगालैंड 
• आपदा प्रबंधन में बी.ए.
• आपदा प्रबंधन में एम.ए.
• आपदा प्रबंधन में एम.फिल.

11. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की (www.iitr.ac.in)
• आपदा न्यूनीकरण तथा प्रबंधन उत्कृष्टता केन्द्र
• आपदा प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

12. त्रिपुरा विश्वविद्यालय, सूर्यमणिनगर, त्रिपुरा (www.tripurauniversity.in)
• भूगोल एवं आपदा प्रबंधन विभाग
• एम.ए.-आपदा प्रबंधन

13. भारतीय रिमोट सेसिंग संस्थान, देहरादून (www.iirsnrsc.in)
• भूखतरों में प्रमाणपत्र/अवेयरनेस
• भूखतरों में पी.जी। डिप्लोमा.
• एम.एससी. भूखतरे

14. उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय, दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल (www.nbu.ac.in)

15. सिविल रक्षा कॉलेज केन्द्र, नागपुर
• अग्नि-शमन इंजीनियरी एवं सुरक्षा में डिग्री/पी.जी. डिप्लोमा.

16. पर्यावरण परिरक्षण प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद

17. आपदा न्यूनीकरण संस्थान, अहमदाबाद
• अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

18. आपदा प्रबंधन केन्द्र, पुणे
• अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

17. एमिटी आपदा प्रबंधन संस्थान, नोएडा
• आपदा प्रबंधन में एम.एससी. तथा पीएच.डी.

19. नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय, पटना

20. राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद

21. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर (www.iitk.ac.in)
• भूकंप इंजीनियरी विभाग
• एम.टेक. (भूकंप इंजीनियरी) एवं पीएच.डी.

22. टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई (www.tiss.edu)
• जमशेदजी टाटा आपदा प्रबंधन केन्द्र
• आपदा प्रबंधन में एम.ए./एम.एससी.

23. आपदा प्रबंधन संस्थान, पर्यावरण परिसर, अरेरा कॉलोनी, भोपाल
• आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षण तथा अनुसंधान

24. राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान, राजेन्द्र नगर, हैदराबाद
• कृषि अध्ययन एवं आपदा प्रबंधन केन्द्र
• आपदा प्रबंधन में अनुसंधान तथा प्रशिक्षण

(उक्त सूची उदाहरण मात्र है)

उच्च अध्ययन कृ पीएच.डी. तथा डॉक्टरोत्तर अनुसंधान

देश में अनेक विश्वविद्यालय तथा संस्थान आपदा प्रबंधन में अनुसंधान कार्यक्रम चलाते हैं, जैसे-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की का आपदा प्रबंधन उत्कृष्टता केन्द्र; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की का भूकंप इंजीनियरी विभाग; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर का भूकंप इंजीनियरी केन्द्र; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली, आपदा प्रबंधन केन्द्र, गुरू गोविंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली, भूगोल विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय; इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, नई दिल्ली; सार्क आपदा प्रबंधन केन्द्र, नई दिल्ली, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, लोदी रोड, नई दिल्ली, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली; प्राकृतिक संसाधन डाटा प्रबंधन प्रणाली (एन.आर.डी.एम.एस) प्रभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली; वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (वै.औ.अ.प), नई दिल्ली, राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान, हैदराबाद; राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र, हैदराबाद; भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान, देहरादून; अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र, अहमदाबाद; राज्य रिमोट सेंसिंग अनुप्रयोग केन्द्र कुछ ऐसे विश्वविद्यालय/ संस्थान/संगठन हैं जहां अनुसंधान की सुविधाएं हैं। अध्येतावृत्ति उम्मीदवार की योग्यता तथा अनुभव के आधार पर रु. 12000/- तथा म.कि.भ. से लेकर रु. 23000/- तथा मकान किराया भत्ता तक है। विदेशों में पी.एच.डी. डिग्री तथा डॉक्टरोत्तर अनुसंधान के लिए अनेक अध्येतावृत्तियां उपलब्ध हैं। अनुसंधान पूरा करने के बाद, देश-विदेश में विश्वविद्यालयों, संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, नीति तथा नियोजन संगठनों में रोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं।

कार्य अवसर:

सरकारी तथा निजी संगठनों में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में रोजगार के अच्छे अवसर हैं। इनके कार्य प्रोफाइल भिन्न हो सकते हैं जैसे- अध्यापन, अनुसंधान, परामर्श, कार्य, प्रलेखन, प्रशिक्षण संयोजक, फील्ड प्रशिक्षण एवं मॉक ड्रिलर विशेषज्ञ। नीचे कुछ ऐसे संगठनों के नाम दिए गए हैं, जहां रोजगार के अवसरों की संभावना हैः-

• राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एन.आई.डी.एम.), गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली
• सार्क आपदा प्रबंधन केन्द्र, एन.आई.डी.एम। भवन, नई दिल्ली
• राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास, नई दिल्ली
• भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आई.आई.पी.ए.), इंद्रप्रस्थ एस्टेट, रिंग रोड, नई दिल्ली
• भारत मौसम विज्ञान विभाग, लोदी रोड, नई दिल्ली
• आपदा प्रबंधन केन्द्र, एच.सी.एम.आर.आई.पी.ए., जे.एल.एन। मार्ग, जयपुर
• हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (एच.आई.पी.ए.), गुड़गांव
• अंबेडकर लोक प्रशासन संस्थान, चंडीगढ़
• श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान, रांची
• जी.बी. पंत हिमालयी पर्यावरण एवं वन संस्थान, नैनीताल, उत्तराखंड
• आपदा प्रबंधन केन्द्र, भोपाल
• आपदा न्यूनीकरण संस्थान, अहमदाबाद
• आपदा प्रबंधन केन्द्र, गुरू गोविंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, कश्मीरी गेट, दिल्ली
• भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भा.कृ.अ.सं.), नई दिल्ली
• भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, नई दिल्ली एवं राज्य इकाइयां
• राज्य राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्रालय/विभाग
• राज्य सरकारी लोक प्रशासन संस्थान
• राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केन्द्र, अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार, हैदराबाद
• अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र, अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार, अहमदाबाद
• भारतीय रिमोट सेसिंग संस्थान, अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार, देहरादून
• राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई
• राष्ट्रीय स्तर का संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी.पी.) तथा राज्य इकाइयां
• विश्वविद्यालयों/संस्थानों तथा विदेशों में संकाय एवं अनुसंधान पद
• आपदा निवारण एवं प्रबंधन अध्ययन के लिए अध्येतावृत्तियां देने वाले संगठन
• आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के गैर-सरकारी संगठन (एन.जी.ओ.)
• राज्य रिमोट सेंसिंग अनुप्रयोग केन्द्र
• अनुसंधान एवं रोज़गार के अवसर वाले अंतर्राष्ट्रीय संगठन

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